प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP)
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) योजना 15 अगस्त 2008 को प्रारंभ की गई थी। यह योजना पूर्व में संचालित प्रधानमंत्री रोजगार योजना (PMRY) एवं ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम (REGP) का एकीकृत स्वरूप है, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म उद्यमों के माध्यम से रोजगार के अवसर सृजित करना है।
राष्ट्रीय स्तर पर इस योजना का संचालन खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) द्वारा किया जाता है, जबकि हिमाचल प्रदेश में इसका क्रियान्वयन हिमाचल प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, राज्य KVIC कार्यालयों एवं जिला उद्योग केंद्रों (DICs) द्वारा किया जाता है।
परियोजना प्रस्ताव PMEGP ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से बैंकों को स्वीकृति हेतु भेजे जाते हैं। सामान्य वर्ग के लाभार्थियों के लिए बैंक परियोजना लागत का 90% तथा विशेष श्रेणी (SC/ST/OBC/अल्पसंख्यक/महिला/दिव्यांग/पूर्व सैनिक आदि) के लाभार्थियों के लिए 95% तक ऋण स्वीकृत करते हैं। शेष 10% अथवा 5% राशि लाभार्थी द्वारा स्वयं अंशदान के रूप में जमा की जाती है।
बोर्ड द्वारा सामान्य वर्ग के लिए 25% तथा विशेष श्रेणी के लिए 35% तक मार्जिन मनी (सब्सिडी) प्रदान की जाती है। ऋण स्वीकृति के पश्चात लाभार्थियों को अनिवार्य उद्यमिता विकास प्रशिक्षण (EDP Training) पूरा करना होता है। ₹5 लाख तक की परियोजनाओं के लिए 6 दिन तथा ₹5 लाख से अधिक की परियोजनाओं के लिए 10/14 दिन का प्रशिक्षण निर्धारित है।
मार्जिन मनी को 3 वर्षों तक सावधि जमा रसीद (TDR) के रूप में रखा जाता है। इस अवधि के दौरान TDR पर कोई ब्याज देय नहीं होता तथा संबंधित ऋण राशि पर भी कोई ब्याज नहीं लिया जाता। इकाइयों का भौतिक सत्यापन KVIC द्वारा अधिकृत एजेंसियों से कराया जाता है। यदि इकाई योजना के सभी मानकों को पूरा करती है, तो 3 वर्ष पश्चात मार्जिन मनी को समायोजित कर दिया जाता है।
वर्ष 2023-24 में बोर्ड द्वारा कुल 1064 परियोजनाएँ प्रायोजित की गईं, जिनमें से 349 परियोजनाएँ स्वीकृत हुईं। इन परियोजनाओं की कुल लागत ₹4293.60 लाख रही, जबकि ₹1431.20 लाख की मार्जिन मनी जारी की गई तथा 2792 व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त हुआ।
योजना के उद्देश्य
• ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में नए स्वरोजगार उद्यमों एवं सूक्ष्म उद्योगों की स्थापना के माध्यम से रोजगार के अवसर उत्पन्न करना।
• पारंपरिक कारीगरों एवं ग्रामीण/शहरी बेरोजगार युवाओं को उनके स्थानीय क्षेत्र में स्वरोजगार उपलब्ध कराना।
• पारंपरिक एवं संभावित कारीगरों तथा बेरोजगार युवाओं को निरंतर एवं स्थायी रोजगार प्रदान कर ग्रामीण युवाओं के शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन को रोकना।
• श्रमिकों एवं कारीगरों की आय क्षमता में वृद्धि कर ग्रामीण एवं शहरी रोजगार वृद्धि दर को बढ़ावा देना।
योजना के अंतर्गत सहायता का स्तर
(i) नए सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना हेतु सहायता
| लाभार्थियों की श्रेणी | लाभार्थी अंशदान | शहरी क्षेत्र सब्सिडी | ग्रामीण क्षेत्र सब्सिडी |
|---|---|---|---|
| सामान्य श्रेणी | 10% | 15% | 25% |
| विशेष श्रेणी (SC/ST/OBC/अल्पसंख्यक/महिला/पूर्व सैनिक/ट्रांसजेंडर/दिव्यांग/पूर्वोत्तर क्षेत्र/आकांक्षी जिले/पर्वतीय एवं सीमावर्ती क्षेत्र आदि) | 5% | 25% | 35% |
महत्वपूर्ण जानकारी
• विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र में मार्जिन मनी सब्सिडी हेतु अधिकतम परियोजना लागत ₹50 लाख तक मान्य है।
• व्यवसाय/सेवा (Business/Service) क्षेत्र में मार्जिन मनी सब्सिडी हेतु अधिकतम परियोजना लागत ₹20 लाख तक मान्य है।
• कुल परियोजना लागत में लाभार्थी अंशदान को छोड़कर शेष राशि बैंक द्वारा प्रदान की जाती है।
• यदि परियोजना लागत विनिर्माण क्षेत्र में ₹50 लाख तथा सेवा/व्यवसाय क्षेत्र में ₹20 लाख से अधिक होती है, तो अतिरिक्त राशि बैंक द्वारा बिना किसी सरकारी सब्सिडी के प्रदान की जा सकती है।
आवेदन प्रक्रिया (Application Process)
परियोजना प्रस्ताव PMEGP ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से बैंकों को स्वीकृति हेतु भेजे जाते हैं। अधिक जानकारी अथवा आवेदन करने के लिए कृपया KVIC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ:
